वित्तवर्ष 2021-22 की पहली छमाही में कमर्शियल व्हीकल लोन में 57% प्रतिशत वृद्धि

News Date 24 Nov 2021

वित्तवर्ष 2021-22 की पहली छमाही में कमर्शियल व्हीकल लोन में 57% प्रतिशत वृद्धि

कोविड-19 से उबरने के बाद 57 प्रतिशत ज्यादा लिया कमर्शियल व्हीकल 

ऑटो सेक्टर की बात की जाए तो वित्त वर्ष 2022 की पहली छमाही में पिछले साल की इसी  अवधि के दौरान लिए गए ऑटो ऋण में 46.15  प्रतिशत ज्यादा की वृद्धि देखी गई। यहां बता दें कमर्शियल वाहन खरीदने के लिए दिए गए इस ऋण राशि के आंकड़ों ने नई ऊंचाईयों को छू लिया है। वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में गत वित्तीय वर्ष की तुलना में 57 प्रतिशत ज्यादा लोगों ने ऑटो खरीदने के लिए ऋण लिए। वित्तवर्ष 2021 की पहली छमाही में 16,714.23 करोड़ रुपए के कमर्शियल व्हीकल लोन बांटे गए थे जबकि वित्तवर्ष 2022 की पहली छमाही में 26,184.35 करोड़ रुपए के लोन बांटे गए हैं। इस प्रकार कमर्शियल व्हीकल लोन में 57 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। हाल यानि वित्त उद्योग विकास परिषद की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से यह पता चलता है। 

एफआईडीसी द्वारा वित्त वर्ष 2022 की पहली छमाही में एक साल पूर्व इसी अवधि में 43,564.77 करोड़ रुपये की तुलना में ऑटो क्षेत्र को 63,669.84 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया था। यह 46.15 प्रतिशत था। इस तरह से तिमाही दर तिमाही सकल एनपीए में क्रमिक कमी भी देखी गई। लेकिन कमर्शियल व्हीकल्स के अंतर्गत ऑटो ऋण ने निश्चित ही एक रिकार्ड कायम किया है। यहां जानते है किस तरह से कमर्शियल वाहन खरीदने के लिए लोगों की सोच में अंतर आया है और लोग ऋण लेकर भी ये वाहन खरीद रहे हैं ताकि उनकी आर्थिक स्थिति पटरी पर आ सके। 

क्यों बढ़ी अचानक नए वाणिज्यिक वाहन खरीदने की डिमांड? 

आपकी जानकारी के लिए यह बता  दें कि देश की राजधानी दिल्ली से लेकर अन्य सभी प्रदेशों में पिछले दिनों से लोगों की भावनाओं में सुधार आ रहा है। इसके परिणाम स्वरूप लोग नए वाहन खरीदने के लिए उधार ले रहे हैं। आर्थिक गतिविधियों में तेजी और माल परिवहन के लिए बढ़ती मांग और दरों के साथ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा नए ऑटो खरीदने के लिए ऋण संवितरण ने वित्त वर्ष 2022 की पहली छमाही में पूर्व के सीओवीआईडी स्तर को छू लिया है। 

बजाज फाइनेंस एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज

यहां बता दें कि फाइनेंस एंड महिंद्रा फाइनेंसिय सर्विसेज ऑटो सेगमेंट में दो प्रमुख एनबीएफसी ने तिमाही दर में तीन महीनों में अपने सकल एनपीए में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। वहीं वित्तीय वर्ष के जुलाई से सितंबर माह में ग्रामीण रिबाउंड क्रेडिट वृद्धि का समर्थन करने वाले प्रमुुख कारकों में एक था। मानसून के विस्तार के रूप में देखें तो पहली छमाही के अंतिम दौर में एमएसपी में भी बढ़ोतरी हुई। इससे कमर्शियल वाहनों की डिमांड बढ़ी क्योंकि माल परिवहन की जरूरत पड़ी। वहीं वाणिज्यिक वाहनों के बाजार में तेजी आई और बिक्री में इजाफा हुआ। बता दें कि भारत में 70 प्रतिशत नए वाणिज्यिक वाहन और 80 प्रतिशत थ्री व्हीलर खरीदे जाते हैं। 

अर्थव्यवस्था को गति मिली 

श्रीराम ट्रांसपोर्ट के एमडी और सीईओ उमेश रेवणकर की मानें तो विभिन्न फसलों पर एमएसपी को 2 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक बढ़ाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्राप्त करने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि सीवी की बिक्री वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में 166,251 यूनिट थी  जो वित्तीय वर्ष 2020 की तिमाही में 167,173 यूनिट के करीब थी। इसका मतलब यह है कि मजबूत अर्थव्यवस्था के कारण गिरावट आंशिक रही। रेवणकर ने इस महीने की शुरूआत में एक और अर्निंग कॉल में कहा है कि बेड़े का अधिक उपयोग, सीमेें स्टील की खपत में वृद्धि, बुनियादी ढांचे का विकास और सडक़ निर्माण सभी सकारात्मक संकेतक थे। 

महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंसियल सर्विसेज ने ये कहा 

कमर्शियल वाहनों की बढ़ती डिमांड और ऑटो ऋण के रिकार्ड के संदर्भ मेंं महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंसियल सर्विसेज के एमडी रमेश अय्यर ने कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद ग्रामीण बाजार काफी नीचे आ गया था लेकिन जैसे-जैसे चीजें खुलने लगीं तो कंपनी ने पाया कि उनके ग्राहक बढ़ रहे हैं और ग्राहक खंड में उछाल आने लगा है। 

इनका यह भी दृष्टिकोण है कि डीलरशिप पर प्रभावशाली वृद्धि और उच्च ग्राहक संख्या देने के बावजूद शेष वर्ष के लिए गति बनाए रखने के बारे में संशय में हैं। इसके पीछे उद्योगों को चिप की कमी का लंबा इंतजार करना भी एक कारण है। यह समस्या यात्री वाहनों के उत्पादन में ज्यादा आ रही है। उन्हे आशा है जैसे-जैसे आपूर्ति बढ़ेगी तो स्थिति में सुधार होगा। वहीं एनबीएफसी का मानना है कि जब माइक्रोफाइनेंस उद्योग में सुधार होना शुरू होगा तो वाहनों की उपलब्धता भी बढ़ेगी और इनके इस्तेमाल एवं प्रदर्शन दोनो बेहतर होंगे। 

ऑटो ऋण के टिकट आकार में हुई वृद्धि 

यहां यह भी बता दें कि ऑटो ऋण टिकट आकार भी बढ़ा है। इसका मुख्य कारण है वाहनों की कीमतों में वृद्धि होना और कमोडिटी मूल्य एवं मुद्रा स्फीति एवं बीएस-6 नियमों के कारण, पिछले पांच वर्षों में ऑटो ऋण का टिकट आकार 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया। वित्त वर्ष 2011 में औसत वाहन ऋण टिकट का आकार बढ कर 5.43 लाख रुपये हो गया। यह वित्त वर्ष 2016 में 4.5 लाख रुपये था। 

मांग में सुधार की संभावना

वित्त वर्ष की दूसरी छमाही की बात करें तो माना जाता है कि पहली छमाही की तुलना में दूसरी छमाही में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में काफी सुधार आ जाता है क्योंकि लोगों के पास नई फसल आ जाती है। इसीलिए उन्हे उम्मीद है कि कमर्शियल वाहनों की आपूर्ति और मांग में सुधार होगा। 

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