पेट्रोल डीजल के दाम : सरकार का मुनाफा बढ़ा, ट्रांसपोर्टरों की टूटी कमर

पेट्रोल डीजल के दाम : सरकार का मुनाफा बढ़ा, ट्रांसपोर्टरों की टूटी कमर

जानें पेट्रोल और डीजल पर सरकार का कितना है मुनाफा

पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से जहां सरकार का मुनाफा बढ़ रहा है वहीं ट्रांसपोर्टरों की कमर टूट रही है। केंद्र सरकार पिछली मनमोहन सरकार की तुलना में पेट्रोल पर करीब 3 गुना और डीजल पर सात गुना ज्यादा टैक्स वसूल रही है। पेट्रोल-डीजल की तेजी से बढ़ती कीमतों का असर आम आदमी, किसान और व्यापारियों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। आम आदमी के घर का बजट बिगड़ गया है। किसान के खेत में फसल की लागत बढ़ गई है और मालाभाड़ा बढऩे से व्यापारियों का मुनाफा पहले से कम हो गया है। 26 फरवरी को दिल्ली में पेट्रोल के भाव करीब 91 रुपए और डीजल के भाव करीब 81 रुपए प्रति लीटर रहे हैं। मई 2014 से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 40 फीसदी की कमी आई है जबकि पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़े हैँ। मई 2014 में क्रूड ऑयल के भाव 106 डालर प्रति बैरल थे जो फरवरी 2021 में 66 डालर प्रति बैरल है। मई 2014 में पेट्रोल करीब 71 रुपए व डीजल 56 रुपए लीटर था। ट्रक जंक्शन की इस पोस्ट में आपको बताएंगे कि पेट्रोल और डीजल की कीमत पर सरकार का मुनाफा कितना है और ट्रांसपोर्टर क्यों परेशान हैं। 


जानें, पेट्रोल-डीजल पर कितनी एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है सरकार 

केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी वसूलकर अच्छी खासी कमाई कर रही है। मुनाफा तीन गुना तक बढ़ गया है। इस समय एक लीटर पेट्रोल पर 32.98 रुपए और डीजल पर 31.83 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूल की जाती है। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद पेट्रोल पर तीन गुना और डीजल पर 7 गुना टैक्स बढ़ चुका है। मोदी सरकार के दोनों कार्यकालों में मई 2014 से फरवरी 2021 तक 13 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई और तीन बार घटाई गई। मई 2014 में केंद्र सरकार एक लीटर पेट्रोल पर 10.38 रुपए और डीजल पर 4.52 रुपए एक्साइज ड्यूटी के रूप में टैक्स वसूलती थी। आखिरी बार मई 2020 में एक्साइज ड्यूटी बढ़ी थी। पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी से केंद्र सरकार की 68 फीसदी तक कमाई बढ़ चुकी है। 


पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से ऐसे बढ़ा सरकार का मुनाफा

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के मुताबिक 2013-14 में एक्साइज ड्यूटी से सरकार ने सिर्फ 77 हजार 982 करोड़ रुपए कमाए थे। जबकि 2019-20 में 2.23 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई हुई है। वहीं 2020-21 के पहली छमाही में यानी अप्रैल से सितंबर तक मोदी सरकार को 1.31 लाख करोड़ रुपए की कमाई हुई। अगर इसमें और दूसरे टैक्स भी जोड़ लें, तो ये कमाई 1.53 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। अगर कोरोना काल नहीं होता तो यह आकड़ा बहुत अधिक ऊपर होता। 


पेट्रोल डीजल पर टैक्स वसूलने में राज्य सरकारें भी पीछे नहीं

पेट्रोल डीजल पर टैक्स वसूलने में राज्य सरकारें भी पीछे नहीं है। हर राज्य में पेट्रोल-डीजल पर अलग-अलग दर से वैट व अन्य सेस के नाम पर टैक्स वसूलती है। पूरे देश में पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा वैट/सेल्स टैक्स राजस्थान सरकार वसूलती है। यहां पेट्रोल पर 38 प्रतिशत और डीजल पर 28 प्रतिशत टैक्स है। राजस्थान के मुख्यमंत्री विधानसभा में स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर वे टैक्स घटाते हैं तो सरकार के राजस्व में भारी कमी आएगी, इससे राज्य के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए केंद्र सरकार को एक्साइज ड्यूटी घटाकर जनता को राहत देनी चाहिए। राजस्थान के बाद मणिपुर, तेलंगाना और कर्नाटक में सबसे ज्यादा 35 प्रतिशत व मध्यप्रदेश में 33 प्रतिशत वैट लगता है।  2013-14 में राज्य सरकारों ने वैट और सेल्स टैक्स से 1.29 लाख करोड़ रुपए कमाए थे। 2019-20 में ये कमाई 55 प्रतिशत बढक़र 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई। 2020-21 की पहली छमाही में ही राज्य सरकारों ने 78 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा कमाए हैं। अगर लॉकडाउन न लगा होता तो यह आंकड़ा और ज्यादा ऊपर होता।

पेट्रोल डीजल के दाम और सरकारी कंपनियों का मुनाफा

देश में तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हैं। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से इन तीनों ही कंपनियों का मुनाफा बढ़ा है। इन तीनों कंपनियों ने दिसंबर 2019 में 4,347 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था। जबकि दिसंबर 2020 में इनका मुनाफा बढक़र 10,050 करोड़ रुपए हो गया।


ट्रांसपोर्टरों ने किया भारत बंद का समर्थन

डीजल के बढ़ते दामों से परेशान होकर ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (एआईटीडब्ल्यूए) ने 26 फरवरी को भारत बंद का समर्थन किया। यहां आपको बता दें कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के प्रावधानों की समीक्षा की मांग करने को लेकर व्यापार संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से भारत बंद का आह्वान किया था। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र आर्य ने कहा है कि भारत बंद के दौरान सीएआईटी को समर्थन दिया गया। एसोसिएशन ने ई-वे बिल को समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि देश में लगातार बढ़ रही पेट्रोल-डीजल की कीमतों से परिवहन उद्योग को परेशानियां हो रहीं हैं। केंद्र सरकार को ईंधन की कीमतों को कम करना चाहिए।


नागालैंड और बंगाल सरकार ने घटाए दाम, दिल्ली में भी मिली राहत

नागालैंड सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 16.50 फीसदी से लेकर 29.80  फीसदी तक की कमी का ऐलान किया है। सरकार के इस ऐलान के बाद वहां पेट्रोल की कीमतों में 18.26 रुपये प्रति लीटर तक की कमी हुई है वहीं डीजल की कीमतों में 11.08 रुपये तक की कमी हुई है। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल के दामों में कटौती की है। राज्य में लोगों को पेट्रोल और डीज़ल 1 रुपये सस्ता मिलने लगा है। दिल्ली की राज्य सरकार ने डीजल एवं पेट्रोल पर अपना वेट 17 प्रतिशत कर दिया, जिससे आम जनता को इनकी कीमतों में 9 से 10 रुपये की राहत दी थी।


कुछ सेक्टरों में मालभाड़ा 20 फीसदी तक बढ़ा

पेट्रोल और डीजल की महंगाई से देश का हर वर्ग प्रभावित हो रहा है। इस साल जनवरी और फरवरी में ही डीजल 07.45 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। अब ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने भी माल भाड़े में वृद्धि कर दी है। राहत की बात यह है कि अभी तक सब्जी फल या फिर अन्य आवश्यक वस्तुओं के मालभाड़े में कोई वृद्धि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डीजल के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी के चलते ट्रांसपोर्टरों ने कुछ सेक्टरों में मालभाड़े में 8 फीसदी से लेकर 15 और 20 फीसदी तक बढ़ोतरी कर दी है। शुरुआत में ट्रांसपोर्टरों ने इंफ्रा सेक्टर, माइनिंग और कच्चे माल समेत कुछ सेक्टरों की मालभाड़े में बढ़ोतरी की है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक सरकार ने डीजल के दाम कम करने के उपाय नहीं किए तो सभी सेक्टरों में मालभाड़ें में बढ़ोतरी की जाएगी। 

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