दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे : दो घंटे का सफर अब मात्र 45 मिनट में 

News Date 02 Apr 2021

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे : दो घंटे का सफर अब मात्र 45 मिनट में 

82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के निर्माण में 8 हजार 346 करोड़ रुपए खर्च

आधुनिक तकनीक से सुसज्जित दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को अब आम जनता के लिए खोल दिया गया है। अब दिल्ली से मेरठ के बीच यात्रा 2 घंटे से कम होकर मात्र 45 मिनट की रह गई है। गाजियाबाद से मेरठ जाने में केवल 30 मिनट का समय लगेगा। उत्तराखंड जाने वाले लोगों को दिल्ली मेरठ हाईवे के लंबे जाम से स्थायी रूप से छुटकारा मिलेगा। कुल 8346 करोड़ रुपए की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 82.01 किलोमीटर है। सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 अप्रैल 2021 को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को आम जनता के लिए खोलने की घोषणा की है। 

 

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर 24 छोटे-बड़े पुल, 10 फ्लाईओवर

82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में 60 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे और 22 किलोमीटर का नेशनल हाईवे स्ट्रेच है। इस एक्सप्रेसवे पर कुल 24 छोटे और बड़े पुल है। इसके अलावा इस एक्सप्रेसवे पर 10 फ्लाईओवर, 3 रेलवे ब्रिज, 95 अंडरपास और पैदल यात्रियों के लिए दर्जनों ओवरब्रिज भी बनाए गए हैं। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का निर्माण चार अलग-अलग चरणों में किया गया है। यह निजामुद्दीन ब्रिज से शुरू होकर यूपी बॉर्डर तक जाता है, जबकि दूसरा चरण यूपी बॉर्डर और डासना के बीच है। तीसरा चरण डासना और हापुड़ के बीच है और अंतिम चरण हापुड़ और मेरठ को जोड़ता है।

 

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की खासियत

  • दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे  पूरी तरह से सिग्नल फ्री है।
  • एक्सप्रेस वे पर कुतुब मीनार, अशोक स्तंभ जैसे स्मारक चिन्ह भी लगाए जाएंगे।
  • सडक़ के दोनों तरफ वर्टिकल गार्डन भी विकसित किए जाएंगे।
  • दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 80 किमी से 100 किमी प्रति घंटे के बीच होगी। 
  • प्रत्येक वाहन की गति दिखाने के लिए प्रत्येक 10 किलोमीटर पर डिस्प्ले स्क्रीन लगाई गई है।
  • एक्सप्रेसवे के चौथे चरण में डासना से मेरठ तक 72 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। 
  • यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरी सडक़ पर 4 हजार 500 से अधिक लाइटें और कैमरे लगाए गए हैं।
  • साइकिल चालकों और पैदल यात्रियों के लिए एक्सप्रेसवे के फेज 1 और फेज 2 की सडक़ों के साथ 2.5 मीटर साइकल कॉरिडोर और 2 मीटर चौड़ा फुटपाथ है।
  • रात में यात्रा को सुखद बनाने के लिए, एक्सप्रेसवे पर रंगीन फ्लैश लाइट भी स्थापित किये गए हैं। 
  • फुटपाथ और साइकिल ट्रैक पर अलग से प्रकाश व्यवस्था की गई है।
  • आस-पास के इलाकों से कनेक्टिविटी के लिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर कई प्रवेश और निकास बिंदु बनाए गए हैं। ये बिंदु अक्षरधाम, डूंडाहेड़ा, सराय काले खां, डासना, इंद्रपुरम और नोएडा में स्थित हैं।
  • आपातकालीन समय पर सहायता के लिए पूरे एक्सप्रेसवे में निरंतर अंतराल पर विशेष आपातकालीन कॉल बॉक्स (ईसीबी) लगाया गया है। 
  • यात्रियों की सुविधा के लिए एम्बुलेंस, क्रेन, पेट्रोल पंप, रेस्तरां, व्हीकल रेपर सेंटर जैसी सुविधाओं का विकास किया गया है।


मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम सबसे खास

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में पहला स्वचालित नंबर प्लेट रीडर के साथ फास्टैग आधारित मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम पेश किया गया है। यह हाईवे पर हाई स्पीड ट्रैफिक के प्रवाह को सुनिश्चित करेगा। फास्टैग टोलिंग सिस्टम के चलते टोल गेट पर वाहनों को रूक कर टोल भुगतान की जरूरत नहीं होगी। 


फिलहाल टोल वसूली नहीं, लेकिन भविष्य में दो तरह से होगी टोल टैक्स की वसूली

एनएचएआई के अधिकारियों के मुताबिक टोल की दरों को दो-तीन दिनों में निर्धारित किया जा सकता है। यहां दो तरह से टोल टैक्स की वसूली होगी। हाई सिक्यॉरिटी नंबर प्लेट कैमरे से रीड करके टोल वसूली होगी या फास्टैग से पैसा कट जाएगा। यदि किसी वाहन में एचएसआरपी नहीं है तो उसके नंबर को रीड करने के बाद घर पर चालान भेजा जाएगा। इसके अलावा दूसरे तरीके से टोल टैक्स की वसूली नाके पर फास्टैग के माध्यम से की जाएगी। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि डीएमई से बाहर निकलने के लिए यूपी गेट, डासना और इंदिरापुरम के अलावा कुछ अन्य स्थानों पर कट हैं। यहां टोल नाका नहीं हैं। यहां से वाहन निकलने से कैमरे के माध्यम से नंबर प्लेट को पढक़र टोल काट लिया जाएगा। 

 

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