ऑडी ई-रिक्शा : इलेक्ट्रिक कारों की पुरानी बैटरियों से चलेंगे ई-रिक्शा

News Date 20 Jun 2022

ऑडी ई-रिक्शा : इलेक्ट्रिक कारों की पुरानी बैटरियों से चलेंगे ई-रिक्शा

जानें, ऑडी ई-रिक्शा से जुड़ी सभी डिटेल्स

देश-दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त होने वाली बैटरी को सस्ती बनाने के लिए कई प्रयोग हो रहे हैं। वहीं इलेक्ट्रिक बैटरियों का कबाड़ भविष्य में बड़ी परेशानी पैदा नहीं कर दें, इसके लिए इलेक्ट्रिक बैटरियों के री-यूज पर दिग्गज कंपनियों ने काम शुरू कर दिया है। दुनियाभर के अमीर लोगों को महंगी कार उपलब्ध कराने वाली कंपनी ऑडी के ई-रिक्शा अब भारतीय बाजारों में दिखेंगे। इन ऑडी ई-रिक्शा की सबसे खास बात यह होगी कि इन ई-रिक्शा में ऑडी इलेक्ट्रिक कारों की पुरानी बैटरियों का उपयोग होगा। जर्मन-भारतीय स्टार्टअप नुनाम (Nunam) देश में तीन इलेक्ट्रिक रिक्शा ला रहा है। 2023 तक इन इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा की बाजार में आने की संभावना है। ट्रक जंक्शन की इस पोस्ट में ऑडी ई-रिक्शा के बारे में बताया गया है।

ऑडी ई-रिक्शा हाई वोल्टेज इलेक्ट्रिक कारों की यूज्ड बैटरियां आएगी काम

स्टार्टअप नुनाम बर्लिन और बेंगलुरू से काम करता है। इस कंपनी ने बैटरी री-यूज की दुनिया में एक नया और अनोखा काम किया है। कारों की हाई वोल्टेज बैटरियां एक निश्चित समय बाद कारों के हिसाब से बेकार हो जाती है। लेकिन इन बैटरियों को दूसरे कार्यों में उपयोग लिया जा सकता है, जैसे की इलेक्ट्रिक वाहनों में। नुनाम ने ऑडी की इलेक्ट्रिक कारों की पुरानी बैटरियों से ई-रिक्शा बनाए हैं। इसमें ऑडी से ही मदद ली गई है और ऑडी एनवायरनमेंटल फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित है। इन ई-रिक्शा में ऑडी की ई-ट्रोन (e-tron) सीरीज की बैटरी का इस्तेमाल किया गया है। अब पायलट प्रोजेक्ट के तहत इंडियन मार्केट में ऑडी के तीन ई-रिक्शा लांच किए जाएंगे। 

भारतीय महिलाओं के लिए पैदा होंगे रोजगार के अवसर

ऑडी का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिक कार बैटरी के जीवन चक्र के पूरा होने के बाद उनके उपयोग का पता लगाना है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में विशेष रूप से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है। नुनाम के अलावा ऑडी एजी और ऑडी एनवायरनमेंटल फाउंडेशन के बीच पहली बार परियोजना के तहत इलेक्ट्रिक रिक्शा के तीन प्रोटोटाइप बनाए गए हैं। ऑडी के अनुसार भारत में रिक्शा चालक न तो ज्यादा दूरी की यात्रा करते हैं और न ही वाहन को तेज चलाते हैं। इसलिए ई-रिक्शा में इलेक्ट्रिक मोटर के ज्यादा शक्तिशाली होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में पुरानी बैटरियां भविष्य में ई-रिक्शा के लिए बेहतर विकल्प साबित होगी।

सोलर ऊर्जा से चलेंगे ऑडी-ई रिक्शा

ऑडी के ई-रिक्शा सौर ऊर्जा से चलेंगे। इनकी बैटरियों को सोलर ऊर्जा से चार्ज किया जा सकेगा। फिलहाल भारत में ज्यादातर इलेक्ट्रिक रिक्शा लेड-एसिड बैटरी द्वारा संचालित हो रहे हैं। इन बैटरियों की लाइफ छोटी होती है। साथ ही इनका निस्तारण भी ठीक से नहीं होता है। इन बैटरियों को बिजली से चार्ज किया जाता है और भारत में अधिकांश बिजली कोयले से पैदा होती है। ई-रिक्शा की इस खामी को दूर करने के लिए ऑडी ई-रिक्शा में बैटरी को चार्ज करने के लिए सोलर चार्जर सिस्टम दिया गया है। इसमें यूज्ड ऑडी ई-ट्रॉन बैटरी दिन भर चार्ज होगी और बफर स्टोरेज यूनिट के रूप में कार्य करेगी और रात को रिक्शा को बिजली प्रदान करेगी। ऑडी का कहना है कि इससे स्थानीय रिक्शा चलाने वाले बड़े पैमाने पर कार्बन मुक्त हो जाएंगे।

ई-रिक्शा में उपयोग के बाद भी काम आएगी बैटरी

स्टार्टअप कंपनी नुनाम के अनुसार बैटरी की लाइफ का पूरा उपयोग कई स्तरों पर किया जा सकता है।  कंपनी का कहना है कि कार व ई-रिक्शा में उपयोग के बाद भी बैटरी का जीवन समाप्त नहीं होता है। उसमें कार्य करने की कुछ संभावना बची रहती है। ई-रिक्शा के बाद भी बैटरी का एलईडी लाइटिंग जैसे स्थिर अनुप्रयोगों को बिजली देने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

भविष्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ‘लाइट’ का प्रयोग बढ़ेगा

नुनाम के को-फाउंडर प्रदीप चटर्जी के अनुसार ऑडी-ई ट्रोन में इस्तेमाल की गई बैटरी काफी पावरफुल है और अगर इसका सही से उपयोग किया जा सके तो इसका काफी अच्छा प्रभाव पड़ेगा। इस प्रोजेक्ट की मदद से यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि हाई वोल्टेज वाली इन बैटरियों को री यूज करने पर क्या नतीजे सामने आते हैं। चटर्जी के अनुसार ऑडी-ई ट्रोन की बैटरियां कम रेंज और बिजली की आवश्यकता वाले वाहनों के साथ-साथ कम वजन वाले वाहनों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। हम इलेक्ट्रिक कारों से इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरियों का पुन:  उपयोग करते हैं। इसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी 'लाइट' कह सकते हैं। भविष्य में इसका चलन बढऩे की उम्मीद है।  ई-रिक्शा पहले चरण में टियर 1 शहरों में और फिर टियर 2 और छोटे शहरों में अलग-अलग चरणों में उपलब्ध होंगे।  इस पायलट प्रोजेक्ट के 2023 में भारतीय सडक़ों पर उतरने की उम्मीद है।

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