ट्रैक्टरों की बिक्री ने कमर्शियल वाहनों को पीछे छोड़ा, एक दशक में सबसे कम ट्रक बिके

News Date 19 Apr 2021

ट्रैक्टरों की बिक्री ने कमर्शियल वाहनों को पीछे छोड़ा, एक दशक में सबसे कम ट्रक बिके

कमर्शियल वाहन : राजस्व और बिक्री के मामले में ट्रक इंडस्ट्री को नुकसान

कोविड-19 से प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 में ट्रैक्टरों की बिक्री ने कमर्शियल वाहनों को पीछे छोड़ दिया है। कमर्शियल वाहनों में ट्रकों की बिक्री 10 साल में सबसे निचले स्तर पर आ गई है। देश की सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कारण ट्रैक्टर इंडस्ट्री ने बिक्री और राजस्व के मामले में बढ़त बनाई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में पहली बार वॉल्यूम और मूल्य दोनों के मामले में ट्रैक्टर की बिक्री ने वाणिज्यिक वाहनों को पीछे छोड़ दिया है। कोरोना महामारी के बावजूद कृषि उपकरण और ट्रैक्टरों की मांग में वृद्धि दर्ज की गई है।

कोरोना काल के दौरान एग्रीकल्चर सेक्टर सबसे कम प्रभावित हुआ और कृषि उत्पादों की मांग लगातार बनी रही। सरकारी नीतियों ने एग्रीकल्चर सेक्टर को अच्छा प्रोत्साहन दिया। इन कारणों से ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों की मांग में वृद्धि बनी रही। लेकिन महामारी के दौरान माल ढुलाई का काम काफी प्रभावित हुआ। देश का ट्रांसपोर्ट व्यवसाय कुछ समय के लिए तो थम सा गया था। इस कारण वित्तीय वर्ष 2020-21 में कमर्शियल वाहनों की बिक्री में गिरावट देखी गई। 


एक दशक में सबसे कम 5.75 लाख ट्रक बिके

देश की आर्थिक गतिविधियों का बैरोमीटर ट्रकों की बिक्री से आंका जाता है। ट्रकों की बिक्री वित्त वर्ष 2020-21 में एक दशक के निचले स्तर पर 5.75 लाख यूनिट रही। जबकि ट्रैक्टरों की बिक्री करीब 26 प्रतिशत बढक़र 8.99 लाख यूनिट रही। मीडिया ग्रुप ईटी मेें प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष में करीब 48 हजार 500 करोड़ रुपए के ट्रैक्टर बेचे गए जबकि कमर्शियल वाहन करीब 47 हजार 500 करोड़ रुपए के बेचे गए। कमर्शियल वाहनों की कीमत अधिक है। ऐसे में कम यूनिट बेची गई।  

 

2014 में ट्रक कम बिके लेकिन राजस्व दोगुना था

वित्त वर्ष 2014 में ट्रैक्टरों की बिक्री ट्रकों से 1400 यूनिट ज्यादा थी, लेकिन उस समय ट्रकों की बिक्री से राजस्व दोगुना हुआ था। इसी प्रकार वित्त वर्ष 2019-20 में ट्रैक्टर और कमर्शियल वाहनों की बिक्री का अंतर करीब 8 हजार यूनिट था। इसमें ट्रैक्टर की बिक्री 7.09 लाख यूनिट और कमर्शियल वाहनों की बिक्री 7.17 लाख यूनिट थी। राजस्व के लिहाज से यह अंतर 21 हजार करोड़ रुपए का था, जिसमें कमर्शियल व्हीकल से 60 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिला था। 

 

जानें, क्या कहते हैं ट्रैक्टर इंडस्ट्री के विशेषज्ञ

महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट सेक्टर के अध्यक्ष और ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमंत सिक्का ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2121 में कोरोना महामारी के बीच कृषि क्षेत्र सबसे अधिक लचीला रहा, यहां प्रतिबंध सबसे कम देखने को मिले और सहूलियत ज्यादा थी। कृषि को एक आवश्यक गतिविधि मानते हुए जारी रखा गया और सरकार की ओर से तमाम तरह की सहायता उपलब्ध कराई गई जबकि अन्य सेक्टर लॉकडाउन से प्रभावित रहे। सिक्का ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला, विनिर्माण और बिक्री नेटवर्क में बहुत तेजी से सुधार के साथ इस क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई।

 

मानसून ने भी दिया कृषि क्षेत्र का साथ

सिक्का के अनुसार लगातार दो साल तक अच्छे मानसून ने भी कृषि क्षेत्र को उत्पादक बनाए रखा। यह 1960 के बाद पहली बार हुआ था। प्रमुख  फसलों की ज्यादा पैदावार हुई। कृषि उपज की 12 प्रतिशत की उच्च दर रही। इससे किसानों की ज्यादा आय हुई और उनके नकदी प्रवाह में भी सुधार हुआ और किसानों ने खेती का जोरदार भविष्य देखते हुए ज्यादा ट्रैक्टर खरीदे। इसके विपरीत औद्योगिक क्षेत्रों को सख्त लॉकडाउन सहना पड़ा। वाणिज्यिक वाहन निर्माताओं को बाजार के फिर से खुलने पर पार्ट्स की कमी के साथ-साथ कार्यबल की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।

 

लोडिंग क्षमता में छूट के कारण नए वाहनों की मांग कम

वित्त वर्ष 19 में नए एक्सल लोड नियमों के जहां कमर्शियल वाहन मालिकों को फायदा हुआ, वहीं निर्माता कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा। नए नियमों के तहत कमर्शियल वाहन 20 प्रतिशत ज्यादा लोडिंग कर सकते हैं, जिससे नए वाहनों की मांग कम हो गई। 

 

पांच साल से ट्रैक्टर इंडस्ट्री की लगातार ग्रोथ

ऑटोमोटिव व्यवसाय का ट्रैक्टर उद्योग ही एक ऐसा सेगमेंट है जो पिछले पांच वर्षों से ग्रोथ कर रहा है। पिछले पांच वर्षों के दौरान ट्रैक्टर उद्योग ने सालाना 12.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है जबकि हल्के कमर्शियल वाहनों को छोडक़र शेष उद्योग ने 1 से 17 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की है। कुल मोटर वाहन उद्योग के राजस्व में ट्रैक्टर उद्योग का हिस्सा पिछले आठ वर्षों में 10 प्रतिशत से कम रहा लेकिन वित्त वर्ष 2021 में बढक़र 15 प्रतिशत हो गया। 

 

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