व्हीकल रिकॉल पोर्टल : वाहन में खराबी पर सरकार सख्त, अब 7 साल तक कर सकेंगे शिकायत

News Date 15 Jul 2021

व्हीकल रिकॉल पोर्टल : वाहन में खराबी पर सरकार सख्त, अब 7 साल तक कर सकेंगे शिकायत

नया नियम टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, फोर-व्हीलर और हल्के व भारी कमर्शियल वाहनों पर लागू

वाहन कंपनियों द्वारा खराब वाहन बेचे जाने पर अब सरकार सख्त हो गई है। ग्राहक अब कंपनी द्वारा खराब वाहन बेचे जाने की शिकायत सीधे सरकार से कर सकेंगे। शिकायत वाहन खरीदने के बाद सात साल तक की जा सकेगी। सडक़ एवं परिवहन मंत्रालय ने हाल ही में परिवहन विभाग की वेबसाइट पर 'व्हीकल रिकॉल पोर्टल' लांच किया है, जहां वाहन मालिक अपने वाहन से निर्माण संबंधी संबंधित गड़बड़ी की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इस पोर्टल से वाहन रिकॉल से जुड़ी शिकायतों का जल्द समाधान होगा। आपको बता दें कि अभी तक वाहन मालिक को वाहन में किसी तरह की खराबी की शिकायत के लिए डीलरशिप जाना पड़ता था लेकिन सरकार ने वाहन मालिकों को राहत देेने के लिए यह समाधान निकाला है।


शिकायत दर्ज होने पर मंत्रालय करेगा जांच, कंपनी को ठीक करना होगा वाहन

पिछले साल परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन एक्ट (1988) में संशोधन कर वाहन कंपनियों के लिए रिकॉल से संबंधित नए नियम बनाए थे। नए नियम को 1 अप्रैल 2021 से लागू कर दिया गया है। यह नियम सभी प्रकार के वाहन यानी, टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, फोर-व्हीलर और हल्के व भारी कमर्शियल वाहनों पर लागू है। नियमों के अनुसार अब वाहन में गड़बड़ी मिलने पर वाहन निर्माताओं को अनिवार्य वाहन रिकॉल जारी करना होगा। अगर आपका वाहन सात साल से कम पुराना है और उसमें निर्माण संबंधी खराबी है तो आप 'व्हीकल रिकॉल पोर्टल' पर जाकर वाहन के संबंध में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद परिवहन मंत्रालय मामले की तफ्तीश करेगा और वाहन में खराबी के आधार पर वाहनों को रिकॉल करने की घोषणा कर सकता है।  राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन (NHTSA) जैसी केंद्रीय एजेंसी दोषों की जांच, निगरानी और सुधार करेगी। आपको बता दें कि भारत में जितनी भी ऑटोमोबाइल कंपनियां हैं वो अभी तक खुद ही इस बात का फैसला करती आई हैं कि किसी वाहन में खराबी है या नहीं और तब जाकर वो वाहन को रिकॉल करती थीं। नय नियम लागू होने के बाद अब वाहन चालक समस्या होने पर खुद ही इस नई सुविधा का लाभ ले सकते हैं।


रिकॉल से मना करने पर 10 करोड़ रुपए तक जुर्माना

इस नियम के लागू होने से पहले देश में वाहन कंपनियां स्वैच्छिक वाहन रिकॉल नीति का पालन करती थी। इसके तहत वाहन में निर्माण संबंधी व अन्य गड़बड़ी सामने आने पर कंपनियां स्वयं वाहन मालिकों को रिकॉल करती थी और गाडिय़ों को ठीक कर उन्हें वापस ग्राहकों को भेजती थी। इस दौरान ग्राहकों की शिकायत सामने आती थी कि रिकॉल के बाद भी उनकी गाडिय़ां ठीक नहीं हुई है। ऐसे में ग्राहकों को आए दिन खराब वाहन से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ता था। इसके साथ ही इन वाहनों के इस्तेमाल से सडक़ दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इस कानून के तहत अगर संबंधित वाहन कंपनी खराब वाहन को रिकॉल करने से इनकार करती है या नियमों का बार-बार उल्लंघन करती है तो उस पर 10 लाख रुपए से लेकर 10 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस नियम को ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा के लिए लागू किया गया है।


रिकॉल का पूरा खर्चा कंपनी उठाएगी, वाहन ठीक कराने की जिम्मेदारी सरकार पर

सरकार के नए नियम के अनुसार वाहनों को रिकॉल करने का पूरा खर्च संबंधित वाहन कंपनियों द्वारा उठाया जाएगा। अगर 6 लाख से ज्यादा टू-व्हीलर या 1 लाख से ज्यादा फोर व्हीलर रिकॉल किए जाते हैं तो ग्राहकों को खराब उत्पाद बेचने के जुर्म में कंपनी पर एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान नए कानून में हैं। इस नए कानून से उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा होगी और खराब वाहन को सही कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार पर होगी। सरकार अपने स्तर पर संबंधित ऑटोमोबाइल कंपनियों से बातचीत करेगी और वाहन को सही कराकर उसे वाहन मालिक को सौपेंगी।

 

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