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31 Aug 2023
Automobile

आखिर क्यों कमर्शियल व्हीकल्स निर्माता डीजल की जगह हाइड्रोजन फ्यूल पर स्विच क्यों करना चाहते है?

By News Date 31 Aug 2023

आखिर क्यों कमर्शियल व्हीकल्स निर्माता डीजल की जगह हाइड्रोजन फ्यूल पर स्विच क्यों करना चाहते है?

बैटरी, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों की आवश्यकता के बारे में जानकारी 

भारतीय कमर्शियल व्हीकल मार्केट में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, हरित ईंधन विकल्पों का उपयोग काफी तेज हो गया है और इनमें हाइड्रोजन फ्यूल भी शामिल है। हाइड्रोजन फ्यूल के कई फायदे हैं, जो इसे पर्यावरण और उपभोक्ता दोनों के लिए काफी बेहतर बनाते हैं। इसलिए, भारत सहित कई देशों में हाइड्रोजन फ्यूल का उपयोग लगातार हो रहा है और लगभग सभी ब्रांड अब हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी पर आधारित ट्रक लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। हाइड्रोजन फ्यूल की कीमत भी इसकी लोकप्रियता का एक मुख्य कारण है, क्योंकि यह हैवी लोडिंग कमर्शियल वाहनों के लिए बहुत ही किफायती है। लेकिन हाइड्रोजन फ्यूल को लेकर कई लोगों के मन में बहुत से सवाल है। आज हम ट्रक जंक्शन के इस आर्टिकल में आपके हाइड्रोजन से जुड़े सभी सवालों का जवाब देने जा रहे हैं।

2030 तक 5 MMT के वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य

4 जनवरी, 2023 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन पारित किया जो हाइड्रोजन इकोसिस्टम को बढ़ावा देने में सहायता करेगा। इस मंजूरी के बाद, इस मिशन को वित्त वर्ष 2024 के केंद्रीय बजट में 19,744 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ शामिल किया गया था। मिशन का लक्ष्य 2030 तक 5 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) के वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन का है, ताकि इंडस्ट्रियल, मोबिलिटी और एनर्जी क्षेत्रों को डीकार्बोनाइज किया जा सके और आयातित जीवाश्म ईंधन और फीड स्टॉक पर निर्भरता को कम किया जा सके।

जीरो-एमिशन, बैटरी, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी वाहनों की आवश्यकता क्यों है?

ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर ईंधन दहन से होने वाले प्रत्यक्ष CO2 एमिशन में 24% का योगदान देता है, जो दुनिया में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 10% पैदा करता है। जीरो-एमिशन टेक्नोलॉजी व्हीकल ग्रीन इंडस्ट्रियल, पर्यावरण और आर्थिक परिवर्तन में सहायता करता है।

हाइड्रोजन आंतरिक दहन इंजन (H2ICE) क्या है? 

H2ICE एक इंजन है, जिसे कमर्शियल व्हीकल के उपयोग के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है। यह इंजन अपने ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग करता है और लगभग शून्य कार्बन उत्सर्जन उत्पन्न करता है। हाल के वर्षों में H2ICE में दिलचस्पी बढ़ी है।

हाइड्रोजन-संचालित आईसीई के प्रकार क्या हैं?

हाइड्रोजन से चलने वाले इंजन दो प्रकार के होते हैं; हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (FCEV) और H2ICE। इलेक्ट्रिक मोटरों को बिजली देने के लिए, FCEV फ्यूल सेल नामक उपकरण में हाइड्रोजन से बिजली का उत्पादन करते हैं। बाद में H2ICE आवश्यक बिजली जनरेट करने के लिए हाइड्रोजन को जलाता है। बता दें, मार्च 2022 में, टाटा मोटर्स ने FCEV बस के अपने प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया और 15 ईंधन सेल बसों के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ एक सौदा किया।

अब H2ICE का उपयोग कौन करता है?

पावरट्रेन डेवलपमेंट कंपनियां हैवी-ड्यूटी अनुप्रयोगों के लिए H2ICE का उपयोग करती हैं। इसका लक्ष्य मल्टीपोर्ट की एफिशिएंसी को बढ़ाना है और वर्तमान पावरट्रेन आर्किटेक्चर का उपयोग करना है। इस साल फरवरी में, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (IIL) ने अशोक लेलैंड के साथ साझेदारी में हैवी-ड्यूटी ट्रकों के लिए अपनी पहली H2ICE टेक्नोलॉजी का अनावरण किया। बता दें, इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक के दौरान बेंगलुरु में किया था। इसके अलावा, जेसीबी ने एफिशिएंट हाइड्रोजन इंजन बनाने के लिए 100 मिलियन यूरो की एक परियोजना शुरू की है।

क्या H2ICE कॉस्ट-इंटेंसिव है?

हां, H2ICE कॉस्ट इंटेंसिव है। यह कंप्रेस्ड एयर को प्रसारित करने के लिए स्वच्छ हाइड्रोजन और एक अत्यधिक विशिष्ट कंप्रेसर की मांग करता है। 

यूरोप FCEV पर स्विच कर रहा है, जबकि भारत H2ICE को प्राथमिकता दे रहा है?

यूरोपीय देश हाइड्रोजन फ्यूल सेल कमर्शियल व्हीकल्स पर स्विच कर रहे हैं। ऐसा तब हुआ जब यूरोपीय यूनियन गवर्नमेंट के प्रतिनिधि मार्च 2020 में ब्रुसेल्स के सोफिटेल में हाइड्रोजन FCEV में बदलाव करके कार्बन-तटस्थ यूरोप के लिए समाधान खोजने के लिए एक साथ आए। DG मूव (मोबिलिटी एंड ट्रांसपोर्ट के DG) के महानिदेशक हेनरिक होलोलेई ने बताया कि टोयोटा यूरोप सर्वेक्षण से पता चला है कि 72% नमूना दर्शकों ने कमर्शियल वाहनों (सीवी) के लिए वैकल्पिक ईंधन माध्यम के रूप में हाइड्रोजन को प्राथमिकता दी। नमूना दर्शकों ने हाइड्रोजन एफसीईवी के लिए मतदान किया। हालांकि, भारत पारंपरिक पावरट्रेन और व्हीकल सिस्टम के मिनिमम रिप्लेसमेंट के रूप में H2ICE पर स्विच कर रहा है, जिससे यह भारत, अफ्रीका और अन्य बजट-सचेत देशों के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बन गया है। यह मौजूदा ICE CV फ्लीट को फिर से फिट कर सकता है, जिससे इसे चुनना एक आसान विकल्प बन जाएगा।

क्या भारत ने FCEV बनाने का प्रयास किया है?

भारत में, टाटा मोटर्स ने इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन) के सहयोग से 2017 में शहर के संचालन के लिए स्टारबस प्रदर्शित की। उस समय में भारत ने मोबिलिटी सेक्टर को डीकार्बोनाइज करने के लिए लेह लद्दाख और दिल्ली में 10 हाइड्रोजन ईंधन-सेल-आधारित इलेक्ट्रिक बसों और इतनी ही मात्रा में ईंधन-सेल-आधारित इलेक्ट्रिक कारों की आपूर्ति के लिए ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) को आमंत्रित किया था। 25 अगस्त 2023 को टीसीपीएल ग्रीन एनर्जी सॉल्यूशंस ने फ्यूल डिलीवरी सिस्टम के साथ H2ICE, बैटरी और फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल सिस्टम का उत्पादन करने के लिए आने वाले वर्षों में 350 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए झारखंड सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

कौनसा फ्यूल है सबसे शुद्ध, FCEV या H2ICE?

हाइड्रोजन FCEV सबसे शुद्ध माना जाता है, इसीलिए पश्चिमी देशों में इसे सबसे अधिक चुना जाता है। हालांकि, पारंपरिक ईंधन (5% से कम प्रदूषक) की तुलना में H2ICE भी शुद्ध है। H2ICE प्रदूषक के रूप में केवल नाइट्रोजन का उत्पादन करता है, जो पारंपरिक ईंधन प्रदूषकों की तुलना में बहुत कम है। भारतीय ओईएम ने पहले ही H2ICE विकसित करना शुरू कर दिया है या जल्द ही उन्हें विकसित करने की योजना बना रहा है। कुछ प्रमुख वाहन निर्माताओं ने ऑटो एक्सपो 2023 में अपनी H2ICE टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया है। इस प्रकार, एमिशन को लगभग जीरो तक कम करने के लिए दोनों व्यावहारिक विकल्प हैं।

भारत में हाइड्रोजन बाजार क्या है?

एशिया क्लीन एनर्जी फोरम 2023, हाइड्रोजन की मांग को लगभग 90 MMT/वर्ष के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसके और बढ़ने की उम्मीद है। 2040 तक इसकी मांग 2.5 से 3.5 गुना बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, यह भी माना जाता है कि ये 2040 तक भारत की प्राथमिक ऊर्जा खपत का 5% से अधिक पूरा नहीं कर पाएगा। बता दें, भारत जीवाश्म ईंधन के आयात में सालाना 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक की बचत कर सकता है, जब वह अंतिम उपयोग वाले सेक्टर्स में फॉसिल फ्यूल को स्थानीय रूप से उत्पादित हाइड्रोजन से बदल देता है। हरित H2 के लिए रिन्यूएबल एनर्जी पावर की आवश्यकता लगभग 400 GW होगी।

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