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इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में थ्री व्हीलर की बिक्री में वृद्धि

News Date 31 Dec 2021

इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में थ्री व्हीलर की बिक्री में वृद्धि

इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर्स के इस्तेमाल बढऩे से ईवी बिक्री में हुआ इजाफा 

भारत की ईवी क्रांति में यदि छोटे वाणिज्यिक वाहनों की बात की जाए तो तिपहिया वाहनों की बिक्री में लगातार वृद्धि हो रही है। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से जारी ईवी पॉलिसी सहित कई तरह की प्रोत्साहन योजनाओं के कारण थ्री व्हीलर्स वाहन खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। बता दें कि तिपहिया वाहनों का जैसे-जैसे इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल बिक्री के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। इसी तरह से यदि ईवी वाहनों के पंजीकरण की संख्या पर गौर किया जाए तो भारत में वर्ष 2020-21 में कुल 8.70 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, इनमें अधिकांश वाहन दो और तीन पहिया वाले थे। यहां बताते हैं इलेक्ट्रिक सेगमेंट के अंदर खासतौर पर तिपहिया वाहन की बिक्री पर कैसे पड़ रहा है सकारात्मक प्रभाव? 

ऊर्जा विशेषज्ञों का यह मानना है

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर पर भले ही अनेक योजनाएं एवं प्रयास चल रहे हों लेकिन यह सच है कि अभी भी इन वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग एवं स्टेशन स्थापित करने की कई तरह की समस्याएं आती हैं। इन समस्याओं को दूर करने की जरूरत है। इस संबंध में हैदराबाद की इलेक्ट्रिक वाहन अवसरंचना कंपनी आरएसी एनर्जी के सीईओ और सह संस्थापक अरुण श्रेयस का मानना है कि कार्यान्वयन के मोर्चे पर विचार अभी भी नौकरशाही के स्तर से जमीनी स्तर पर नहीं पहुंचा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के आदान-प्रदान और स्टेशन स्थापित करने आदि के लिए सरल प्रक्रिया होना जरूरी है। हालांकि केंद्र सरकार की केबिनेट ने ईवी पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। वहीं RACEnergy ने वाहन बैटरी की लागत निकाल कर और स्वैपिंग स्टेशनों के नेटवर्क के माध्यम से एक सेवा के रूप में ऊर्जा की पेशकश करके एकीकृत समाधान विकसित किया है। 

तिपहिया वाहनों में बैटरी स्वैप करना आसान 

इलेक्ट्रिक वाहनों में तिपहिया वाहनों अधिक लोकप्रिय होने का कारण यह भी है कि इनके ड्राइवर अपनी डिस्चार्ज की गई बैटरियों को कुछ ही मिनटों में चार्ज की गई बैटरी से स्वैप कर सकते हैं। इससे वे लंबी अवधि तक सडक़ पर चल सकते हें। अपने प्लेटफार्म पर वाहनों को ऑनबोर्ड करने के लिए कंपनी रेट्रोफिट किट प्रदान करती है। यह वर्तमान आंतरिक दहन इंजन क्षमता को ऑटो रिक्शा में इलेक्ट्रिक में परिवर्तित कर देती है। 

दिल्ली में रोजाना 150 स्टेशनों पर 5000 बैटरी होती है स्वैप 

बता दें कि एनसीआर दिल्ली में दो पहिया और तिपहिया वाहनों के लिए बैटरी स्वैप करने की सुविधाओं में काफी विस्तार हुआ है। यहां पुलकित खुराना बैटरी स्मार्ट के सह संस्थापक हैं, जो इलेक्ट्रिक टू और थ्री व्हीलर्स के लिए बैटरी स्वैपिंग के लिए भारत का सबसे बड़ा नेटवर्क कहा जा सकता है। इस समूह के दिल्ली एनसीआर में 150 स्थानों पर स्टेशन हैं जहां प्रतिदिन 5000 बैटरी स्वैप की जाती हैं। खुराना का कहना है कि हमें इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों की की तर्ज पर सोच विकसित करें। वहीं डिस्चार्ज की गई बैटरी  को चार्ज की गई बैटरी से बदलने के लिए दो मिनट का समय लें। शेष दिन के लिए 70 से 100 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए तैयार हों। वहीं खुराना का यह भी कहना है कि अब वह समय नहीं है जब कोई वाणिज्यिक वाहन मालिक अपने ईवी की बैटरी चार्ज करने के लिए स्टेशन पर घंटों तक लाइन में खड़ा रहेगा। 

इस तरह से घटा सकते हैं बैटरी लागत 

इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के लिए यह भी आवश्यक है कि बैटरी लागत कम हो। इसके लिए ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि स्वैपिंग के बाद बैटरी एक सेवा के रूप में आती है। दो-तीन साल बाद नई बैटरी की आवर्ती खरीद पर बचत की जा सकती है। यह सच है कि बैटरियों की उच्च लागत ने चौपहिया वाहनों को अब मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर कर दिया है लेकिन तिपहिया वाहन मालिकों के लिए बैटरी स्वैप करना आसान है। जरूरत है कि आगामी समय में स्वैप स्टेशनों की दूरी कम हो ताकि इलेक्ट्रिक वाहन संचालकों को बैटरी चार्ज करना सुगम रहे। 

भारत में 2.5 मिलियन ई रिक्शा हो रहे संचालित 

बता दें कि भारत में कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में ई- रिक्शा वाहनों की संख्या 2.5 मिलियन है। इसके बावजूद इन वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों के तौर पर कम आंका जाता है। इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर्स ने राजस्थान, पश्चिमी बंगाल, पंजाब और दिल्ली में अपनी पैठ बढाई है। इस संबंध में आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र खुराना मानते हैं कि तिपहिया वाहनों को घर या कार्यस्थल पर चार्ज करना एक बेहतर विकल्प है। यदि वाहन दिन में 30 किलोमीटर चलता है तो, रात भर चार्ज करने से आपको व्यक्तिगत उपयोग में अच्छी-खासी रेंज मिल जाएगी। आजकल अनेक चार्जिंग कंपनियां हाउसिंग सोसायटी के साथ भी सीधे जुड़ रही हैं। 

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