स्लीप डिटेक्शन डिवाइस : ट्रक चालकों का गाड़ी चलाने का समय होगा तय 

News Date 23 Sep 2021

स्लीप डिटेक्शन डिवाइस : ट्रक चालकों का गाड़ी चलाने का समय होगा तय 

ट्रक सहित सभी कमर्शियल वाहनों में स्लीप डिटेक्शन सेंसर लगाने पर जोर

ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी बहुत ही व्यस्त होती है। आमतौर पर ट्रक ड्राइवर लांग रूट पर लोड लेकर चलते हैं। कई बार गंतव्य तक पहुंचने में दो या तीन दिन भी लग जाते हैं। ऐसे में ट्रक ड्राइवरों को वाहन चलाते समय नींद नहीं सताए ऐसा हो  नहीं सकता। लंबे रूट पर नींद की झपकी आती ही है। यदि नींद पूरी नहीं हुई तो गाडी चलाते समय भीषण हादसा भी घटित हो सकता है। दुर्घटनाओं के कारणों के सर्वे  में नींद के कारण भी करीब 2 से 3 प्रतिशत दुर्घटनाएं होती हैं। बता दें कि अत्यधिक व्यस्त और लंबे रूटों पर ट्रक चलाना इतना आसान काम नहीं है। 

ट्रक ड्राइवरों की परेशानी को देखते हुए केंद्रीय सडक परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ट्रक चालकों के लिए वाहन चलाने की समय सीमा तय करने की सिफारिश  की है। इसके लिए उन्होंने खास तौर पर कमर्शियल वाहनों में नींद का पता लगाने वाले डिवाइस का प्रयोग करने पर जोर दिया है। गडकरी ने कहा है कि जिस तरह से पायलट के काम करने के घंटे सीमित होते हैं उसी तरह से ट्रक ड्राइवरों के लिए भी ड्राइविंग टाइम तय होना चाहिए। इसका फायदा यह होगा कि नींद के कारण होने वाली सडक़ दुर्घटनाओं में कमी आएगी और अनेक लोगों और ट्रक ड्राइवरों को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाया जा सकता है। यहां जानते हैं, केंद्रीय परिवहन मंत्री गडकरी ट्रक ड्राइवरों के लिए क्या नए मापदंड तय करने जा रहे हैं। इनका क्या लाभ हो सकता है। 


राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा परिषद की बैठक में उठाया मुद्दा 

यहां बता दें कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी यूरोपीय देशों की तर्ज पर भारत के ट्रकों में बेहतर सुरक्षा उपाय करने के पक्ष में हैं। उन्होंने हाल ही आयोजित हुई राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा परिषद में नामित नए सदस्यों के साथ परिचय बैठक में ट्रक ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग का समय सुनिश्चित करने पर जोर दिया। गडकरी का कहना था, हर राज्य में डिस्ट्रिक्ट रोड कमेटी की बैठक अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। उन्होंने एनआरएससी में मनोनीत सदस्यों का आह्वान किया कि वे सडक़ सुरक्षा के क्षेत्रों में काम करें ताकि सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। वहीं बैठक के बाद केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री गडकरी ने अपने ट्वीट में बताया कि कमर्शियल वाहनों में स्लीप डिटेक्शन सेंसर (sleep detection sensors) / स्लीप डिटेक्शन डिवाइस को लगवाने की नीति पर अधिकारियों को काम करने का निर्देश दिया गया है। यूरोपीय देशों की मानकों के आधार पर जल्द ही भारत के ट्रकों में भी सुरक्षात्मक उपाय बेहतर किए जाएंगे। 


परेशानियों से भरी होती है ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी 

यहां आपको बता दें कि ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी व्यस्त और कई तरह की परेशानियों से भरी होती है फिर भी वे हर वक्त चेहरे पर मुस्कान रखते हैं। भारत में ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी को लेकर सेव लाइफ फाउंडेशन ने 10 शहरों के करीब 12,00 ट्रक ड्राइवरों पर सर्वे किया। इनमें आधे से अधिक लोगों को यह पेशा कम पसंद आया लेकिन वे आजीविका के लिए ट्रक ड्राइवर का काम कर रहे हैं। 40 प्रतिशत ट्रक ड्राइवरों ने पुलिस, आरटीओ और अन्य कई कारणों को परेशान करने के लिए जिम्मेदार ठहराया। 27.2 ट्रक ड्राइवरों ने माना कि उनको हर पल एक्सीडेंट की आशंका रहती है इसलिए वे इस पेशे से ज्यादा खुश नहीं हैं। वहीं 58.3 प्रतिशत ट्रक ड्राइवरों ने कहा कि ट्रक चलाते समय उन्हे बहुत थकान हो जाती है। इनमें नींद का पूरा नहीं हो पाना भी एक कारण है। 


सरकार का इथेनॉल से संचालित वाहनों के उत्पादन पर जोर 

यहां आपको बता दें कि सरकार लगातार पेट्रोलियम ईंधन बचत और पर्यावरण सुधार पर जोर दे रही है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों कहा था कि केंद्र सरकार आगामी छह माह में 100 प्रतिशत बॉयोफ्यूल से चलने वाली गाडियों के लिए नई नीति तय करेगी। जानकारी के अनुसार इस नीति के अंतर्गत सभी वाहन निर्माता कंपनियों को बायोफ्यूल आधारित गाडियों का उत्पादन करना अनिवार्य होगा। सरकार के इस कदम से देश में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में बड़ी सफलता मिलेगी। इसके साथ ही ईंधन की कीमतें भी गिरेंगी। 


डीजल वाहनों के कम उत्पादन की सलाह 

समय के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों और बायोफ्यूल से संचालित वाहनों की डिमांड हो रही है।  डीजल और पेट्रोल के भाव आसमान छू रहे हैं। ऐसे में ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार डीजल  से चलने वाले वाहनों के कम से कम उत्पादन पर बल दे रही है। इस संदर्भ में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा  कि वाहन कंपनियों को ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना चाहिए जो प्रदूषण को कम करने में सहायक हों। डीजल वाहन पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। परिवहन मंत्री  गडकरी ने  ऑटो उद्योग को वैकल्पिक ईंधन के लिए अनुसंधान और इसके विकास पर निवेश करने की अपील भी की है। बैठक के दौरान सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल वी.के. सिंह भी उपस्थित रहे।

 

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