स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम से रुकेंगी वाहन दुर्घटनाएं

News Date 08 Nov 2021

स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम से रुकेंगी वाहन दुर्घटनाएं

जानें, ड्राइवरों के लिए अन्य ध्यान रखने वाली बातें 

भारत में बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं और इनके कारणों पर गौर किया जाए तो सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 70 प्रतिशत सडक़ दुर्घटनाएं अधिक गति के कारण होती हैं। वाहन दुर्घटनाओं  में प्रति वर्ष देश में हजारों लोगों की जान चली जाती है। इन दुर्घटनाओं पर कैसे अंकुश लगे इसके लिए भारत के विभिन्न आईआईटी संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा अपनी तरह की रिचर्स की जा रही है। यह सडक़ के बुनियादी ढांचे और भौगोलिक स्थिति के आधार पर ड्राइवर को ओवर स्पीड से बचने के लिए सतर्क करेगा। इसके लिए शोधकर्ताओं ने हाल ही नया सिस्टम खोजा है। इसका नाम है स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम। आइए, जानते हैं क्या है स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम और कैसे रुकेंगी इस सिस्टम से वाहन दुर्घटनाएं? 

ओवर स्पीड से ऐसे बचाएगा स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम 

यहां बता दें कि वाहनों की अधिक स्पीड को नियंत्रित करने के लिए स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम (Smart Speed Warning System) आईआईटी वैज्ञानिकों का एक नवीनतम शोध है। इनके अध्ययनों से पता चला है कि एक वाहन के लिए सुरक्षित गति सडक़ ज्यामिति में परिवर्तन के साथ महत्वपूर्ण रूप से भिन्न हो सकती है जैसे तेज या अंध वक्र अथवा हेयरपिन मोड आदि की तरह। वहीं एक गतिशील एवं अनुकूलन सीमा को शामिल करते हुए एक स्मार्ट गति चेतावनी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। ओवरस्पीडिंग से संबंधित दुर्घटनाओं से बचने के लिए आगामी सडक़ बुनियादी ढांचों में परिवर्तन भी जरूरी है। आईआईटी गुहावटी में सिविल इंजीनियरिंग प्रोफेसर अखिलेश कुमार मौर्य ने एक समाचार समूह को ऐसा बताया। 

स्मार्ट स्पीड सिस्टम ड्राइवरों को देगा चेतावनी

यहां आपको बता दें कि स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम के जरिए ट्रक, पिकअप, मिनी ट्रक या जिस भी वाहन पर ये सिस्टम लगा होगा उसके ड्राइवर को पहले से ही चेतावनी मिल जाएगी। यह सिस्टम सडक़ किनारे वक्रों पर पहुंचने पर अंधा वक्र या हेयरपिन मोड सहित अन्य हादसों के कारणों की पहले ही चेतावनी दे देगा। पारंपरिक चेतावनी प्रणाली निश्चित गति सीमा पर आधारित होती है लेकिन इससे ड्राइवरों को वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाव के लिए फौरन वार्निंग मिल जाती है। 

सरकार ने भी किए दुर्घटना कम करने के प्रयास 

यहां आपको बता दें कि सरकार ने ड्राइवरों के लिए 2019 के नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत तेज गति के जुर्माने को दस गुना तक बढा दिया था। हालांकि आईआईटी गुहावटी और बाम्बे के शोधकर्ताओं का मानना है कि वर्तमान गति नियंत्रक उपकरण एक आकार सभी पर फिट बैठता है, यह समाधान है लेकिन इसमें बहुत अधिक बुद्धि नहीं है। पहाड़ी इलाकों, मैदानी इलाकों या रेगिस्तानी इलाकों में ड्राइविंग करते समय एक ही प्रणाली प्रभावी ढंग से काम कर सकती है। 

ड्राइवरों का अनुशासित होना जरूरी 

सडक़ दुर्घटनाओं से बचाव के लिए ट्रक सहित अन्य सभी प्रकार के वाहनों के ड्राइवरों का अनुशासित होना भी बहुत जरूरी माना जाता है।  एक सर्वे के अनुसार विकासशील देशों में ड्राइवर अच्छी तरह से अनुशासित नहीं होते हैं। अक्सर सडक़ ज्यामिति की उनकी धारणा के आधार पर ड्राइव करते हैं। इसलिए 98वें प्रतिशत वाहन की गति ऐसे देशों में राजमार्ग खंड की सुरक्षा का मूल्यांकन करने में उपयोगी हो सकती है। ड्राइवर सडक़ मार्ग की ज्यामितीय विशेषताओं के आधार पर वाहनों को सुरक्षित गति से संचालित करने का इरादा रखते हैं। 

इन तीन कारणों से होती हैं सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं 

वाहन चलाते समय चालक को क्या -क्या सावधानियां रखनी होती हैं, इससे अधिकांश ड्राइवर जानते हुए भी अनजान बने रहते हैं और आए दिन देश में अनेक सडक़ हादसे इन सामान्य गलतियों से हो जाते हैं। यहां आपको बताते हैं वे तीन कारण जो सडक़ दुर्घटनाओं के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार माने जाते हैं। वाहन दुर्घटनाओं के ये तीन कारण इस प्रकार हैं- 

1. ड्राइवर को नींद आना 

यह सच है कि खास तौर पर ट्रक, बस, पिकअप, कार या अन्य भारी वाहन चलाते समय अक्सर ड्राइवरों को नींद आ जाती है। आप जब भी लंबी यात्रा पर निकल रहे हैं तो यह सुनिश्चित कर लें कि कहीं आपकी नींद तो पूरी हो गई है। यदि नींद अधूरी है तो निश्चित रूप से ड्राइव करते हुए आपको नींद आ सकती है और यह नींद कभी भी सडक़ हादसे का सबब बन सकती है। 

2. नशे की लत

यदि ड्राइवर को नशे की लत है तो यह ना सिर्फ उसकी स्वयं की जिंदगी बल्कि वाहन में सवार अन्य यात्रियों एवं अपने साथियों के लिए भी बहुत खराब है। ऐसे ड्राइवर जो कमर्शियल वाहन अधिक चलाते हैं और लंबी दूरी पर माल परिवहन को अंजाम देते हैं उनके लिए नशे की आदत किसी भी दिन जानलेवा साबित हो सकती है। बेहतर यही है कि ड्राइवर किसी भी तरह के नशे से दूर रहें। कम से कम गाडी चलाते वक्त तो नशा नहीं करें। 

3. तेज रफ्तार से वाहन चलाना 

वाहन चलाते वक्त गतिसीमा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। यदि चालक गतिसीमा से अधिक यानि बहुत तेज गति से वाहन चलाते हैं तो दुर्घटनाओं की ज्यादा आशंका रहती है। ड्राइवरों को चाहिए कि जहां स्पीड ब्रेकर आएं वहां गति धीमी रखें। इसके अलावा गतिसीमा का पालन करें वरना तेज रफ्तार में यदि सामने से कोई वाहन आएगा तो कैसे बचाव होगा। 

हाइवे पर कैसे चलाएं वाहन? 

कई बार अकुशल चालक जब पहली बार हाइवे पर निकलते हैं तो वे कार, ट्रक, बस, मिनी ट्रक यहां तक कि दुपहिया वाहन भी उसी तरह से चलाते हैं जैसे ग्रामीण सडक़ों पर चल रहे हों। आपको बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन चलाते समय छोटी-छोटी गलतियां भी दुर्घटना का कारण बन जाती हैं। यहां हाइवे पर वाहन चलाने के कुछ खास टिप्स बताए जा रहे हैं। 

1. भारी वाहनों से दूरी रखना जरूरी 

हाइवे पर गाडी चलाते समय भारी वाहनों जैसे ट्रक और बसों से उचित दूरी बनाए रखें। कई ट्रकों के पीछे तो यह लिखा भी होता है कि उचित दूरी रखें। वहीं कई ट्रकों के पीछे बैरियर लगा होता है। इसकी वजह से छोटे वाहन जैसे थ्री व्हीलर या कार आदि टकरा जाते हैं। इसके अलावा बैरियर के कारण छोटे वाहन टकरा कर खड़े हो जाते हैं। लेकिन ऐसा हर बार हो यह जरूरी नहीं, कई बार एयरबैग्स भी नहीं खुलते हैं और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। 

2. हाइवे के मोड पर ओवरटेक करने से बचें

कई हाइवे पर डिवाइडर नहीं होते हैं। ऐसे में हाइवे पर वाहन चलाते समय मोड पर ओवरटेक करने से बचें। टर्न पूरा होने के बाद ही ओवरटेक करें। इससे संभावित दुर्घटनाओंं से बचा जा सकता है। 

3. रात्रि में करें लो बीम का इस्तेमाल 

सडक़ दुर्घटनाओं से बचने के लिए ड्राइवरों को चाहिए कि वे रात्रि में वाहन चलाते समय लो बीम का इस्तेमाल करें। यदि रात्रि में हाई बीम होगा तो हाइवे पर डिस्टेंस का ख्याल रखना मुश्किल हो जाता है। 

4. यहां स्लो नहीं करें स्पीड 

अक्सर कई बार ड्राइवर यह गलती कर बैठते हैं कि रोड के थर्ड राइट लेन में धीरे गाडी चलाते हैं जबकि ये लेन ओवरटेक करने के लिए होती है। इससे पीछे से आ रही गाडी की आपसे टक्कर होने की ज्यादा संभावना रहती है। इस तरह से यदि ड्राइवर सजग रहते हुए वाहन चलाएंगे तो दुर्घटना की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं। 

 

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