जानें कैसे बना ट्रक ड्राइवर का बेटा आईएएस अधिकारी

News Date 14 Oct 2021

जानें कैसे बना ट्रक ड्राइवर का बेटा आईएएस अधिकारी

सीकर जिले के राकेश ख्यालिया की देश में 152वीं रैंक 

आम तौर पर ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी इतनी व्यस्त होती है कि वे अपने घर-परिवार पर इतना ध्यान नहीं दे पाते लेकिन ड्राइवर लाइन में होते हुए भी यदि आपने सही समय पर अपने बच्चों को उच्च शिक्ष दिला दी है तो उनके सपनों को पूरा करने के लिए भी थोड़ा वक्त निकालें। इससे  आपके बच्चे आपके सही ड्राइव करने से ऊंची उड़ान भरने में कामयाब हो सकते हैं। यहां बता दें कि राजस्थान के सीकर जिले के कटराथल गांव निवासी एक ट्रक ड्राइवर के बेटे राकेश ख्यालिया  ने अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में देश भर में  152 वीं रैंक हासिल कर अपने माता-पिता के सपनों को साकार कर दिखाया। आइए, जानते हैं कैसे बना एक साधारण ट्रक ड्राइवर परिवार का युवा आईएएस अधिकारी? अन्य ट्रक ड्राइवर परिवारों के लिए भी यह एक मिसाल है। 

विदेशी बैंक की नौकरी छोड़ी, आईएएस परीक्षा दी 

राजस्थान के सीकर जिले के कटराथल के रहने वाले राकेश ख्यालिया की इस स्वर्णिम सफलता का राज उसने सोशल मीडिया पर शेयर किया। इनका कहना है कि उनके पिता अशोक कुमार ने लंबे समय तक ट्रक चलाया है। वे सफल ट्रक ड्राइवर होने के साथ-साथ मुझे भी सही तरह से ड्राइव करते रहे। उन्होंने बचपन से ही मेरा विशेष ध्यान रखा। मेरी सफलता के पीछे माता-पिता दोनों का ही बहुत सहयोग रहा। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद राकेश ने बैंक ऑफ अमेरिका में नौकरी की लेकिन यहां उनके मन में हमेशा यही कशिश रहती कि उनके कई साथी बहुत आगे निकल गए हैं ऐसे में वे इस जॉब को ज्यादा दिन नहीं कर पाए। इस दौरान उनके माता-पिता ने कभी उन्हे निराश नहीं होने दिया। पिता द्वारा सही दिशा में ड्राइव करने से उन्होने आईएएस परीक्षा 2019 की तैयारी की। पहले प्रयास में वे सफल नहीं हुए तो फिर उन्होंने आईएएस परीक्षा 2020 की जम कर तैयारी की। इस बार वे सफल रहे। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में ही इस परीक्षा का परिणाम आया है। राकेश ख्यालिया की देश में 152 वीं रैंक बनी है वहीं ओबीसी में इनकी  28 वीं रेैंक है। 

ट्रक ड्राइवर अशोक कुमार को मिल रही बधाइयां 

राजस्थान के शेखावाटी में सीकर जिले के कटराथल गांव निवासी ट्रक ड्राइवर रहे अशोक कुमार को उनके पुराने ट्रक ड्राइवर साथियों की ओर से फोन पर लगातार बधाइयां मिल रही हैं। अशोक कुमार के अनुसार बच्चों को यदि सही समय पर उचित गाइड लाइन मिल जाए तो वे अपने सपनों को पूरा करने के साथ मां-बाप का नाम रोशन कर देते हैं। 

सीनियर तक की पढ़ाई  गांव के स्कूल से की 

यह सच नहीं है कि अफसर बनने के लिए आपकी पढ़ाई कॉन्वेंट स्कूल में ही हो। आईएएस बने राकेश ख्यालिया के अनुसार उन्होंने आठवी तक की पढ़ाई अपने गांव के पास दौलतपुरा से हिन्दी माध्यम से की। इसके बाद 12 वीं तक की शिक्षा भी पास के ही एक स्कूल में पूरी की। उन्होंने कानपुर आईआईटी से उन्होंने इंजीनियरिंग की। उनका सपना आईएएस बनने का था इसलिए यही लक्ष्य रखा और अंत में सफल रहे। 

शिक्षा को बढ़ावा रहेगी मुख्य प्राथमिकता

आईएएस में चयन होने पर राकेश ख्यालिया का कहना है कि उनकी नियुक्ति के बाद सरकार की ओर से जो भी जिम्मा सौंपा जाएगा वे उसे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे लेकिन उनकी निजी प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब बच्चों 

 

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