ई-विद्युत का रेट्रोफिट समाधान: महाराष्ट्र में व्यावसायिक संचालन शुरू
देश में इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ज्यादा कमाई के लिए पेट्रोल-डीजल से चलने वाले ऑटो रिक्शा चालक भी अपने वाहन को इलेक्ट्रिक में बदलना चाहते हैं लेकिन नया निवेश उन्हें चिंता में डाल देता है। अब इसका समाधान बाजार में आ गया है। महाराष्ट्र के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप ई-विद्युत ने अपनी तिपहिया रेट्रो फिटमेंट तकनीक का व्यावसायिक संचालन शुरू किया है। अगर ऑटो रिक्शा को रेट्रो फिट तकनीक का इस्तेमाल कर इलेक्ट्रिक में बदला जाता है तो हर दिन चालक को बड़ी बचत होती है।
आइए, ट्रक जंक्शन की इस पोस्ट से जानें कि ई-विद्युत की रेट्रोफिट तकनीक ऑटो रिक्शा चालकों को कैसे फायदा पहुंचाएगा और कंपनी की नई रणनीति क्या है।
दो-स्ट्रोक और फोर-स्ट्रोक ऑटोरिक्शा को बदल सकेंगे इलेक्ट्रिक में
ई-विद्युत की यह तकनीक भारत में ARAI प्रमाणित दो-स्ट्रोक और फोर-स्ट्रोक ऑटोरिक्शा को इलेक्ट्रिक में बदलने में सक्षम है और यह देश में इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। स्टार्टअप ने रेट्रो फिटमेंट तकनीक का व्यावसायिक संचालन पहले चरण में महाराष्ट्र में शुरू किया है। पहले दिन ही 30 ऑटोरिक्शा पंजीकृत किए, जो इस तकनीक के लिए बढ़ती मांग को दर्शाता है। ई-विद्युत भारत की उन चुनिंदा दो कंपनियों में से एक है, जिसके पास थ्री-व्हीलर रेट्रोफिटमेंट के लिए ARAI प्रमाणन है और दोनों इंजन प्रकारों के लिए प्रमाणित एकमात्र इकाई है।
रेट्रोफिट किट लगाने पर मिलेगी 132 किमी की रेंज
भारत के ऑटोरिक्शा बाजार में 35 लाख से अधिक 5 से 15 साल पुराने वाहन चल रहे हैं। ई-विद्युत का ElectroMotion रेट्रोफिट समाधान चालकों को मौजूदा पेट्रोल या सीएनजी ऑटोरिक्शा को कम लागत में इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की सुविधा देता है। तकनीकी विवरणों के अनुसार, रेट्रोफिट किट प्रति चार्ज 132 किलोमीटर की प्रमाणित रेंज प्रदान करती है और दैनिक ईंधन खर्च में 70% तक बचत करती है। इसके अलावा, यह प्रति वर्ष लगभग 1.5 टन CO₂ उत्सर्जन को रोकने में मदद करता है।
दो साल में 50,000 ऑटोरिक्शा को इलेक्ट्रिक में बदलने का लक्ष्य
ई-विद्युत के सह-संस्थापक और सीटीओ सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि कंपनी अगले दो साल में कम से कम 50,000 ऑटोरिक्शा को इलेक्ट्रिक में बदलने की योजना बना रही है। स्टार्टअप दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और गुजरात समेत छह अन्य राज्यों में अपने संचालन का विस्तार करने के लिए तैयार है।
इस स्टार्टअप को क्रॉस-बॉर्डर वेंचर कैपिटल फर्म पोंटाक का समर्थन प्राप्त है। पोंटाक के मार्गदर्शन और निवेश की मदद से ई-विद्युत ने अपनी तकनीक को और बेहतर बनाया और जरूरी प्रमाणपत्र भी हासिल किए।
पोंटाक की जनरल पार्टनर लोपा मिश्रा ने कहा कि यह पहल शहरी परिवहन में बड़े बदलाव लाने, चालकों के वित्तीय लाभ, पर्यावरणीय सुरक्षा और देश में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी।
ई-विद्युत का रेट्रोफिट समाधान अब पूरी तरह कानूनी और सुरक्षित
ई-विद्युत के रेट्रोफिट समाधान को RTO और ARAI दोनों से मंजूरी मिल चुकी है। इसका मतलब है कि परिवर्तित ऑटोरिक्शा का व्यावसायिक और कानूनी संचालन पूरी तरह सुरक्षित है। यह तकनीक खासतौर पर उन ऑटोरिक्शा चालकों के लिए फायदेमंद है, जो नए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के बजाय अपने पुराने पेट्रोल या सीएनजी वाहन को इलेक्ट्रिक में बदलना चाहते हैं।
सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों और विभिन्न प्रोत्साहनों के चलते अब रेट्रोफिट समाधानों के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार हो गया है। ई-विद्युत का यह कदम भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
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