बीएस मानक : जानें, बीएस मानक से कैसे कम होगा वाहन प्रदूषण

News Date 27 Aug 2021

बीएस मानक : जानें, बीएस मानक से कैसे कम होगा वाहन प्रदूषण

अब बीएस- 4 ट्रक की बजाय खरीदें बीएस-6 ट्रक, होगा दोहरा लाभ 

छोटे शहरों से लेकर महानगरों में वाहन प्रदूषण की समस्या दिनोंदिन गहराती ही जा रही है। देश भर में वायु प्रदूषण के कारण सडक़ों पर पैदल चलने वालों को सांस लेना भी दूभर हो रहा है। पर्यावरण को वाहनों प्रदूषण से हो रहे भारी नुकसान से सरकार ने अब प्रदूषण नियंत्रण के तहत मानक निर्धारित किए हैं। इसके लिए केंद्र  सरकार ने भारत स्टेज के रूप में नामित वाहनों के लिए जो मानदंड तय किए हैं उसके तहत अब सडक़ों पर बीएस-4 मानक वाले ट्रकों सहित अन्य वाहनों का  चलन भी कम हो जाएगा। नेशनल हाइवेज की बात की जाए तो सर्वाधिक वाहनों में ट्रकों का ही संचालन होता है। ट्रक जंक्शन पर  ट्रक व्यवसायियों को सलाह दी जाती है कि वे बीएस-4 की बजाय बीएस-6 ट्रक खरीदने में ही निवेश ज्यादा करें। इससे दोहरा लाभ होगा। ईंधन की बचत और माइलेज भी ज्यादा होगी। बीएस-6 मानक वाले वाहनों के संचालन के लिए केंद्र सरकार ने एक अप्रैल से केवल बीएस-6 अनुपालन वाहनो के निर्माण, बिक्री और पंजीकरण के लिए वाहन निर्माता कंपनियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसे अप्रैल 2020 से अनिवार्य कर दिया गया है। जानकारी के लिए बता दें कि  धुआं उगलने के कारण वायु प्रदूषण में सबसे ज्यादा योगदान ऑटोमोबाइल्स वाहनों का ही होता है। 

क्या है बीएस 6 मानक और इसके लाभ 

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि बीएस-6 मानक है क्या? आपको बता दें कि भारत सरकारी द्वारा मोटर वाहनों से होने वाले प्रदूषण  को नियंत्रित करने के लिए निश्चित मानदंड निर्धारित किए हैं। दरअसल बीएस-6 एक उत्सर्जन मानक है। इसके आधार पर ही प्रदूषण कंट्रोल का पता लगता है। सरकार के आदेशानुसार सभी वाहन निर्माता कंपनियों को अब बीएस-6 मानक वाले वाहनों का ही उत्पादन ज्यादा करना होगा। दूसरे शब्दों में यूं कहा जाए कि बीएस-6 यूरो-6 से काफी -मिलता जुलता मानक है। जानकारी के लिए बता दें कि बीएस-6 वाहनों में कंपनी द्वारा एक एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम फिट किया जाएगा। यह डीजल वाहनों में 70 प्रतिशत और पेट्रोल वाहनों में 25 प्रतिशत तक नाइट्रोजन-आक्साइड के उत्सर्जन को कम 
करेगा। परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार बीएस-6 मानक के वाहन संचालन से यह लाभ होगा कि प्रदूषण के कण 0.05 से घट कर 0.01 रह जाएंगे। इससे पर्यावरण साफ रहेगा। प्रदूषण 75 प्रतिशत तक घट जाएगा। 

लोकडाउन में ट्रक निर्माताओं ने लांच बीएस-6 वाहन लांच 

यहां यह बता दें कि अप्रैल 2020 से लेकर वर्तमान तक और निकट भविष्य में भी  बीएस-6 वाहनों के उत्पादन में सभी कंपनियां उत्साह दिखा रही हैं। यदि कोरोना काल की बात की जाए तो लगभग 3 महीने के लॉकडाउन के दौरान भी ट्रक निर्माता कंपनियों ने भारत में बिक्री के लिए बीएस-6 अनुपालना वाले वाहन ही ज्यादा लांच किए। ऑटोमोबाइल्स विशेषज्ञों की मानें तो बीएस-6 वाहनों में 70 प्रतिशत कम वायु प्रदूषण होता है।  ये वर्तमान बीएस-4 वाहनों की तुलना में अधिक कुशल होंगे। यही कारण है कि बीएस-6 ट्रकों में ट्रक व्यवसायी अधिक निवेश करने के लिए तैयार हैं। बीएस-6 वाहनों में ईधन की बचत भी होगी। यह कहना भी सच है कि बीएस-4 के बजाय  बीएस-6 गाडियां महंगी मिलेेंगी। इसकी मुख्य वजह है नई तकनीक में लागत ज्यादा होना। 

बीएस-4 की तुलना में बीएस- 6 क्यों है बेहतर 

यहां यह बता दें कि बीएस -4 वाहनों की तुलना में बीएस-6 मानक वाले वाहन क्यों बेहतर माने जा रहे हैं। इसकी खास वजह यह है कि बीएस-6 वाहनों में विशिष्ट तकनीक पर आधारित इंजन के कारण प्रदूषण फैलाने वाले पदार्थों का उत्सर्जन बेहद कम होता है जबकि बीएस -4 में यह अधिक होता है। बीएस-4 और बीएस-3 में सल्फर की मात्रा 50 पीपीएम तक होती है जो हमारे लिए काफी खतरनाक है। दूसरी ओर बीएस-6 मानक वाले वाहनों में सल्फर की मात्रा 10 पीपीएम तक ही रह जाती है। इससे बहुत कम प्रदूषण हो पाता है। कुल मिला कर यदि सडक़ों पर बीएस-6 वाहनों का संचालन ज्यादा से ज्यादा हो तो वायु प्रदूषण से काफी हद तक मुक्ति मिल सकती है। 

बीएस-6 गाडियोंं  की  बढ़ रही  है डिमांड  

बीएस-6 आधारित कार हो या ट्रक अथवा अन्य  आटोमोबाइल्स वाहन इनकी कीमत बीएस-4 से अधिक ही रखी गई है। जैसे-जैसे इन गाडियों की मांग बढ रही है तो कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। इलेक्ट्रिकल्स वायरिंग बदलने से लागत और बढ जाएगी। एक अनुमान के अनुसार बीएस-6 गाडियां 15 से 17 प्रतिशत तक महंगी हो सकती हैं। 

बीएस-6 ट्रकों की रहेगी अधिक माइलेज 

बीएस-6 इंजन से लैस ट्रक और अन्य गाडियों की माइलेज निश्चित तौर पर ज्यादा रहेगी।  माइलेज को लेकर कंपनियां झूठा दावा नहीं कर सकेंगी। सरकार की ओर बीएस-6 नियम अनिवार्य कर दिए जाने से अब सभी वाहन मालिकों को यह करना पड़ेगा कि वे नई गाडियों के तौर पर बीएस-6 मानक वाला वाहन ही खरीदेंगे। देश में लगभग सभी नेशनल हाइवे पर बीएस-6 इंजन वाले वाहनों का संचालन बढ रहा है। इनकी माइलेज भी बढिया है। 

रजिस्ट्रेशन पीरियड तक ही वैध रहेंगे बीएस-4 वाहन 

बीएस-6 वाहनों की बढती मांग और सरकार की ओर से जारी निर्देशों की पालना के चलते अब बीएस-4 वाहनों की डिमांड घट रही है। ये धीरे-धीरे सडक़ों से गायब होने वाले हैं। पिछले दिनों केंद्रीय वित्त मंत्री ने घोषणा भी की थी कि मार्च 2020 तक खरीदे गए सभी बीएस वाहन  अपने रजिस्ट्रेशन पीरियड तक ही वेलिड माने। 

 

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