भारत की सड़कों पर रोज लाखों लोगों को मंजिल तक पहुंचाने वाला ऑटो-रिक्शा आने वाले समय में बिल्कुल नए इलेक्ट्रिक अवतार में नजर आ सकता है। हुंडई और टीवीएस मोटर मिलकर भारत के लिए एक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर विकसित कर रहे हैं, जिसे जरूरत के हिसाब से पैसेंजर ट्रांसपोर्ट, सामान ढुलाई और इमरजेंसी सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इस कॉन्सेप्ट को 2026 IDEA Awards में Gold मिलने के बाद इसकी चर्चा और बढ़ गई है। खास बात यह है कि अप्रैल 2026 में दोनों कंपनियों ने E3W के विकास और कमर्शियलाइजेशन के लिए जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट भी किया है। अब यह प्रोजेक्ट कॉन्सेप्ट से आगे बढ़कर टेस्टिंग, लोकलाइजेशन और प्रोडक्शन की दिशा में जा रहा है।
तो सवाल यह उठता है कि यह नया वाहन आखिर दिखेगा कैसा? यह किसके लिए बनाया जा रहा है? और मौजूदा इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स से यह कितना अलग होगा?
इस प्रोजेक्ट में हुंडई E3W और E4W नाम के दो इलेक्ट्रिक माइक्रो-मोबिलिटी कॉन्सेप्ट शामिल हैं। E3W एक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर, जबकि E4W एक इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर है। इन्हें हुंडई जेनेसिस ग्लोबल डिजाइन ने तैयार किया है और टीवीएस मोटर के साथ मिलकर विकसित किया गया है।
इनका डिजाइन पारंपरिक ऑटो-रिक्शा से प्रेरित है, लेकिन इसे आधुनिक इलेक्ट्रिक तकनीक और नए डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। आसान भाषा में कहें तो, भारत में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे ऑटो-रिक्शा को नए इलेक्ट्रिक और स्मार्ट रूप में पेश करने की कोशिश की गई है।
हुंडई के इस माइक्रो-मोबिलिटी कॉन्सेप्ट की पहली झलक भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में दिखाई गई थी। इसमें भारतीय सड़कों को ध्यान में रखते हुए एडजस्टेबल ग्राउंड क्लीयरेंस, जरूरत के हिसाब से बदला जा सकने वाला इंटीरियर और खास थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम जैसे फीचर्स पर ध्यान दिया गया था।
हुंडई E3W और E4W को भारत की शहरी सड़कों और रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इनमें कई ऐसे फीचर्स हैं, जो इन्हें सामान्य इलेक्ट्रिक ऑटो से अलग बनाते हैं।
E3W और E4W की खासियत यह है कि इन्हें किसी एक काम तक सीमित नहीं रखा गया है। इनके मॉड्यूलर डिजाइन के कारण एक ही प्लेटफॉर्म को जरूरत के हिसाब से अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इनका उपयोग यात्रियों के परिवहन, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी के साथ-साथ इमरजेंसी सेवाओं में भी किया जा सकता है। यानी एक ही वाहन को अलग-अलग जरूरतों के अनुसार ढाला जा सकता है। हालांकि, E3W और E4W अभी कॉन्सेप्ट स्टेज में हैं, इसलिए इनके अंतिम प्रोडक्शन मॉडल में कौन-कौन से फीचर्स शामिल होंगे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
हुंडई E3W और E4W का डिजाइन मौजूदा इलेक्ट्रिक ऑटो से अलग नजर आता है। जहां आमतौर पर इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर किसी एक खास काम, जैसे पैसेंजर या कार्गो के लिए तैयार किए जाते हैं, वहीं इन कॉन्सेप्ट्स को एक से ज्यादा जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने की सोच के साथ बनाया गया है।
ध्यान देने वाली बात: ये सभी फीचर्स फिलहाल कॉन्सेप्ट के तौर पर दिखाए गए हैं। E3W और E4W के प्रोडक्शन मॉडल की कीमत, बैटरी, रेंज और लॉन्च डेट की पुष्टि उपलब्ध स्रोत में नहीं की गई है। इसलिए इन चीजों को लेकर कोई अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
हुंडई के E3W और E4W इलेक्ट्रिक माइक्रो-मोबिलिटी कॉन्सेप्ट्स ने अमेरिका की Industrial Designers Society of America (IDSA) की ओर से आयोजित 2026 IDEA Awards में ‘Concepts & Speculative Design’ कैटेगरी में Gold Award जीता है।
इस अवॉर्ड के बाद इन दोनों कॉन्सेप्ट्स को दुनियाभर में पहचान मिली है। खास बात यह है कि इन्हें भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनमें यात्रियों को लाने-ले जाने के साथ सामान की डिलीवरी और इमरजेंसी सेवाओं के लिए भी इस्तेमाल की संभावना रखी गई है।
हालांकि, E3W और E4W अभी कॉन्सेप्ट स्टेज में हैं। इसलिए इनके प्रोडक्शन मॉडल के तौर पर लॉन्च होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, हुंडई और टीवीएस मोटर की साझेदारी और इस कॉन्सेप्ट को मिला गोल्ड अवॉर्ड इसे भारत के भविष्य के इलेक्ट्रिक लास्ट-माइल मोबिलिटी सेगमेंट में एक खास प्रोजेक्ट बनाता है।
हुंडई मोटर और टीवीएस मोटर ने इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के विकास और मार्केटिंग के लिए अप्रैल 2026 में एक जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें टीवीएस मोटर अपना इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म, थ्री-व्हीलर इंजीनियरिंग क्षमता और स्थानीय बाजार की समझ उपलब्ध कराती है, जबकि हुंडई डिज़ाइन और को-डेवलपमेंट की जिम्मेदारी संभालती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में मौजूद प्रोडक्शन सुविधाओं से घरेलू मांग पूरी करने के साथ-साथ भविष्य में वाहनों को अन्य देशों में एक्सपोर्ट भी किया जा सकता है, और घरेलू बाजार में बिक्री की जिम्मेदारी टीवीएस मोटर के पास रहने की उम्मीद है। प्रोडक्शन के लिए जरूरी पार्ट्स स्थानीय स्तर पर ही तैयार किए जाएंगे, और इस समझौते के तहत बनने वाला पहला वाहन सबसे पहले भारत में ही लॉन्च किया जाएगा।