राजस्थान सरकार ने अपने बजट 2024-25 और 2025-26 के तहत राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) को आधुनिक बनाने के लिए सुधार योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 1300 नई बसों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इससे न केवल बसों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सेवाएं भी मिलेंगी। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं।
आरएसआरटीसी की अतिरिक्त मुख्य सचिव, शुभ्रा सिंह ने बताया कि इन सुधारों का उद्देश्य परिसंपत्तियों का आधुनिकीकरण करना और परिचालन को पुनर्जीवित करना है। 2017-18 में RSRTC के पास करीब 5000 बसें थीं, जो घटकर 2024-25 में केवल 3500 रह गईं। बेड़े में लगभग 1,400 वाहन एक दशक से भी अधिक पुराने हैं, जिन्हें इस वर्ष बंद कर दिया जाएगा। इस चुनौती का सामना करने के लिए, राज्य सरकार ने 1,300 नई बसें खरीदने की मंजूरी दे दी है।
इन नई बसों में डीलक्स इंटरसिटी बसें, ब्लू लाइन सेवाएं, वोल्वो कोच और इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में, निगम ने सभी 900 डीजल-चालित बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बनाई है। इनमें से 300 इलेक्ट्रिक वाहन राज्य सरकार के बजट से खरीदे जा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के माध्यम से अतिरिक्त 600 बसें खरीदी जाएंगी। इन नई बसों के शामिल होने के बाद, वित्तीय वर्ष के अंत तक आरएसआरटीसी के बेड़े में बसों की कुल संख्या करीब 5,000 होने की उम्मीद है।
RSRTC न केवल अपने बेड़े का विस्तार कर रहा है, बल्कि यात्री अनुभव को भी बेहतर बनाने पर जोर दे रहा है। निगम ने 66 करोड़ रुपये का ऋण जुटाकर मौजूदा डिपो में बुनियादी ढांचे के नवीनीकरण की शुरुआत की है। वर्तमान में, 76 बस स्टैंड और वर्कशॉप्स का नवीनीकरण किया जा रहा है, जिससे रोशनी, बैठने की जगह और स्वच्छता जैसी यात्री-केंद्रित सुविधाओं में सुधार होगा। इस वित्तीय वर्ष में 40 अतिरिक्त बस स्टैंडों का भी विकास किया जाएगा। राज्य ने "बस पोर्ट" के रूप में अत्याधुनिक बस स्टैंड बनाने का भी प्रस्ताव किया है। ये बस टर्मिनल मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब के रूप में काम करेंगे, जिनमें यात्री प्रतीक्षा क्षेत्र, फूड कोर्ट, ईवी चार्जिंग स्टेशन और वाणिज्यिक आउटलेट शामिल होंगे। अजमेर, भरतपुर, बीकानेर, उदयपुर, ब्यावर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और बूंदी सहित आठ स्थानों पर इन बस पोर्टों के लिए व्यवहार्यता अध्ययन पहले ही किए जा चुके हैं।
इन सभी नई और मौजूदा बसों में पैनिक बटन, GPS-आधारित टेलीमैटिक्स और CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। पैनिक बटन महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाएंगे, जबकि जीपीएस डिवाइस बसों की स्पीड और मार्ग का पालन ट्रैक करेंगे। सीसीटीवी का उपयोग किराया संग्रह की निगरानी और कदाचार को रोकने के लिए किया जाएगा।
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