लॉजिस्टिक न्यूज : कोविड-19 की दूसरी लहर से ट्रासंपोर्ट व्यवसाय को भारी झटका

लॉजिस्टिक न्यूज : कोविड-19 की दूसरी लहर से ट्रासंपोर्ट व्यवसाय को भारी झटका

कोविड-19 की दूसरी लहर : मालभाड़े में गिरावट, दहशत में ट्रांसपोर्ट व्यवसायी

कोविड-19 की दूसरी लहर ने एक बार फिर देश के ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को झटका दिया है। मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। दिल्ली की मंडियों में खाद्य पदार्थ और सब्जियों की आवक कम हुई है। अप्रैल के पहले पखवाड़े में आशा के अनुरूप मालभाड़े में भारी कमी देखी गई है।  ट्रांसपोर्ट सेक्टर के थिंक टैंक भारतीय परिवहन अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर के कारण अप्रैल के पहले पखवाड़े में मंडियों (कृषि उपज मंडी समितियों या एपीएमसी) में खाद्य पदार्थों और फल-सब्जियों आदि वस्तुओं के आगमन में गिरावट आई है। कोरोना की इस नई लहर के कारण ट्रक किराए में वृद्धि की उम्मीद गायब हो गई है। बल्कि ट्रक भाड़ा कम हो गया है। यहां आपको बता दें कि एपीएमसी की स्थापना राज्य सरकारों द्वारा किसानों को फसल की अच्छी कीमत दिलाने और अनुचित सौदेबाजी से बचाने के लिए की गई है। मंडियों में प्रतिदिन लाखों की संख्या में ट्रक माल को लाने व ले जाने के लिए पहुंचते हैं।


कई राज्यों में प्रतिबंध, दहशत में ट्रांसपोर्ट व्यवसायी

कोविड-19 के बढ़ते मामलों से देशभर में एक दहशत का माहौल है। राज्य सरकारों की ओर से पाबंदिया लगाई गई है जिससे बाजार में मांग का अभाव बना रहेगा और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय एक बार फिर प्रभावित होगा। हालांकि मार्च 2021 के अंतिम पखवाड़े से डीजल और टायर की कीमतें अपरिवर्तित रही हैं, फिर भी माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। फैक्ट्री गेटों से डिस्पैच में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारतीय परिवहन अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (आईएफटीआरटी) के सीनियर फेलो एस.पी. सिंह के मीडिया में प्रकाशित बयान के अनुसार पिछले पखवाड़े में कोविड-19 की नई लहर से एपीएमसी में खाद्य पदार्थों और फल-सब्जियों के आगमन में गिरावट आई है। इसके पीछे प्रमुख कारण होटल और रेस्तरां की मांग में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट है। 


दिल्ली-मुंबई-दिल्ली मार्ग पर किराया 16 फीसदी तक कम हुआ

आईएफटीआरटी के अनुसार 1 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच ट्रक मार्गों पर 18-20 टन पेलोड पर ट्रक किराया कम हो गया है। दिल्ली-मुंबई-दिल्ली मार्ग पर किराया 14 अप्रैल को 16 प्रतिशत गिर गया है। 1 अप्रैल को किराया 1.35 लाख रुपए था जो 14 अप्रैल को 1.15 लाख रुपए पहुंच गया। दिल्ली और मुंबई उत्तर और पश्चिम के दो बड़े महानगर हैं और दोनों शहरों को कोविड -19 के मामलों में तेज वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है।


दिल्ली-नागपुर-दिल्ली मार्ग पर किराए में 10 प्रतिशत की कमी

इसके अलावा दिल्ली-नागपुर-दिल्ली मार्ग पर किराए में 10 प्रतिशत (1.07 लाख रुपये से लेकर 96,800 रुपये) तक की गिरावट आई है। आपको बता दें कि नागपुर देश का केंद्र बिंदु है जहां बड़ी संख्या में कंपनियों के गोदाम है। 


दिल्ली-रांची दिल्ली और दिल्ली-चेन्नई दिल्ली मार्ग का किराया भी घटा

इसी तरह दिल्ली-रांची-दिल्ली मार्ग पर किराए में 15 फीसदी की गिरावट आई है। किराया 1.17 लाख रुपए से घटकर 1 लाख रुपए हो गया है। वहीं दिल्ली-चेन्नई-दिल्ली मार्ग पर किराए की दरें 13 प्रतिशत (1.55 लाख रुपये से लेकर 1. 35 लाख रुपये) तक कम हैं, जबकि दिल्ली-कांडला-दिल्ली मार्ग पर ट्रक किराए में 15 प्रतिशत की गिरावट (1.02 लाख रुपये से 86 हजार रुपए) आई है।


ट्रक बेड़े के उपयोग में 60 फीसदी तक की कमी, घर लौटने को तैयार ड्राइवर

कोरोना वायरस की दूसरी लहर से व्यापार, वाणिज्य और उद्योगों की स्थिति गंभीर है। ट्रक बेड़े के उपयोग में 60 फीसदी तक की कमी आई है। ट्रक ड्राइवर अपने घर, कस्बों या गांवों में लौटने की तैयारी कर रहे हैं जिससे परिवहन व्यवसाय में दहशत फैली हुई है। देशभर में आईएफटीआरटी द्वारा ट्रैक किए गए 75 मध्यम और लंबे ढुलाई के ट्रक मार्गों पर "प्रत्यक्ष या पिछले दरवाजे लॉकडाउन" की आशंका के कारण ट्रकिंग व्यवसाय को पिछले महीने उछाल के बाद अचानक मंदी का सामना करना पड़ा है।


कोविड-19 की दूसरी लहर : ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को सरकार से राहत

कोविड-19 की दूसरी लहर से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बचाने के लिए सरकार की ओर से कुछ राहत दी गई है, वहीं कुछ और राहतों का ट्रांसपोर्टरों को इंतजार है। सरकार ने रोड टैक्स या परमिट शुल्क के भुगतान को 30 जून, 2021 तक तीन और महीनों तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा लगातार दूसरे वर्ष बीमा शुल्क में वार्षिक बढ़ोतरी (अप्रैल से हर साल प्रभावी वर्ष) को नियामक के आदेश पर टाला गया है, जो बेड़े के मालिकों के लिए एक राहत के रूप में आया है। लेकिन अगर स्थिति सुस्त रहती है, तो ट्रकों की ईएमआई भुगतान में कमी देखी जा सकती है। ट्रक यूनियनों ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है।

 

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